Our History

राजस्थान में श्री केसरिया धाम महातीर्थ बनाने का विचार...

अजमेर-मिलवाडा-चितौडगढ के आसपास हमारे ट्रस्ट द्वारा कई जिनमंदिरो के जीर्णोद्धार कार्य हुए है या हो रहे है। कई गाँवो में प्रतिमाएँ ज्यादा थी और पूजा करने वाले कम! एवं सभी गाँवो में धर्मशाला व भोजनशाला की व्यवस्था करना संभव नहीं था। अतः हमने यह तय कीया की सभी गाँवो के बीच नेशनल हाईवे पर जगह प्राप्त करके तीर्थ का निर्माण कीया जाए जहाँ प्राचीन प्रतिमाएँ तथा मेवाड की धरोहर को संभाला जाए। इस उद्देश से यहाँ तीर्थ का निर्माण हो रहा है। तीर्थधाम होने से यात्री यहां पधारेंगे व रुक सकते है… आसपास के प्राचीन तीर्थों की यात्रा भी कर सकते है।

वर्तमान में श्री केसरिया धाम तीर्थ में धर्मशाला-भोजनशाला चल रही है, यात्रीयो का आवागमन चालु है। पूजा-अर्चना दैनिक चल रही हैं, मन्दिरो का कार्य प्रगति पर है। एक होल में विशेष कलाकृती वाले के मन्दिरों में १३१ प्राचीन प्रभुजी बिराजमान है।

Architectural rendering of Kesariya Dham temple, showcasing a grand white marble structure with intricate carvings, multiple spires, and a majestic staircase entrance, set in a lush green landscape.

प्रस्तुत प्रदेश में हमारे ट्रस्ट द्वारा हुए जीर्णोद्धार की सूचि-

हमारे ट्रस्ट की कर्मभूमि

ट्रस्ट द्वारा विगत 10/12 वर्षों से इस क्षेत्र में कई मंदिरो के जीर्णोद्धार करवाए गए है… अतः बिजयनगर-गुलाबपुरा अब संस्था की कर्मभूमि सी बन गई है। समय-समय पर आस-पास के मंदिरो का शुद्धिकरण अभियान, जैनत्व जागरण अभियान, उपकरणपूर्ती, जिनमंदिर भक्ति हेतु राशी अर्पण, श्वेताम्बर मूर्तिपूजक श्रमण श्रमणी वृंद का विचरण, ओपन बुक एक्झाम इत्यादि प्रवृत्तियाँ चलती रहती है। विगत वर्षों में अपने साधर्मिक परिवारो को बसाकर इस क्षेत्र में लोगो को जिनशासन से जोडने का कार्य ट्रस्ट द्वारा हो रहा है। अनेक साधर्मिक परिवारो की भक्ति, अनुकंपा, पांजरापोल में सहयोग आदि भी दीया जाता है।

  • वर्षों से बंद हालत में रहे हमारे कई प्राचीन जिनालयो को पुनः चालु करवाना, पूजा-अर्चना की व्यवस्था की गई।
  • नाकोडा आदि गौशाला में शेडो का निर्माण करवाया गया।
  • अंटाली में स्कूल में सरस्वती मंदिर का निर्माण करवाया गया ।
  • लम्पी वायरस रोग के समय गाँव-गाँव में दवाईयाँ तथा लड्डु का वितरण किया गया ।
  • कोरोना काल में कई संघो को मंदिर भक्ति हेतु साधारण द्रव्य का वितरण किया गया एवं साधर्मिक भक्ति की गई।
  • मंदिर की सुद्दठ व्यवस्था हेतु पूजारी के पगार, मंदिर के उपकरण, समय-समय पर अठारह अभिषेक, जिनालय शुद्धिकरण करवाने का आयोजन होता है।
  • गाँवो के पूजारीओ को पूजा की ट्रेनींग दी जाती है
  • साधर्मिक परिवारो के द्वारा जैनत्व का प्रचार-प्रसार करवाया जाता है।
  • अन्य कई शासनप्रभावक व रक्षा के कार्य ट्रस्ट द्वारा होते है।
  • पुरे विस्तार में जिनमन्दिरो का सर्वे कीया गया ।
  • कई जगह मन्दिरो के पट्टे दस्तावेज व ट्रस्ट बनाए गए।
  • प्राचीन प्रतिमाजीओ को अन्यत्र पूजा हेतु भेजा गया।
  • बिखरे पडे प्राचीन जैन अवशेषो को एकत्रीत कीया गया। जो केसरिया धाम म्युझीयम में रखे जाऐंगे।

श्री केसरिया धाम श्वेतांबर मूर्तिपूजक तपागच्छ जैन ट्रस्ट

केसरिया धाम में आपका स्वागत है, जहाँ आप शांति और आस्था का अनुभव कर सकते हैं। यहाँ जैन धर्म से जुड़े धार्मिक और सामाजिक कार्य होते हैं।

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